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वकील पर सरेआम हमला: सुप्रीम कोर्ट सख्त, दिल्ली पुलिस से मांगी स्टेटस रिपोर्ट

देश की राजधानी में एक सुप्रीम कोर्ट के वकील पर हुए जानलेवा हमले को शीर्ष अदालत ने बेहद गंभीरता से लिया है। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि वह अधिवक्ता पंकज शर्मा पर हुए हमले की जांच की मौजूदा स्थिति पर एक विस्तृत स्टेटस रिपोर्ट सौंपे।

क्या है पूरा मामला?
वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के सदस्य पंकज शर्मा के घर में 11 जुलाई को कुछ लोग जबरन घुस आए और उन पर बर्बरता से हमला किया। इस हमले में उनके सिर पर गंभीर चोटें आईं और 8 टांके लगे।

दबंगई की हद: याचिका में आरोप लगाया गया कि स्थानीय नेताओं से साठगांठ के चलते आरोपी इतने बेखौफ हैं कि 12 जुलाई को उन्होंने दोबारा वकील के घर जाकर पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी। विकास सिंह ने चिंता जताते हुए कहा, “अगर सुप्रीम कोर्ट के एक वकील के साथ देश की राजधानी में ऐसा हो सकता है, तो आम नागरिकों की सुरक्षा का क्या होगा?”

सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख:
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने साफ किया कि पीड़ित और उनके परिवार की व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जीवन को कोई खतरा नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने आदेश दिया कि जांच की रिपोर्ट पुलिस उपायुक्त (DCP) स्तर से कम रैंक के अधिकारी द्वारा दाखिल नहीं की जानी चाहिए।

  • लालू प्रसाद यादव को बड़ी राहत: जमानत याचिका में दखल देने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार
    चारा घोटाले से जुड़े देवघर कोषागार मामले में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उन्हें झारखंड हाई कोर्ट से मिली जमानत को रद्द करने की सीबीआई (CBI) की याचिका को खारिज कर दिया है।

आधी सजा का आधार: लालू यादव को देवघर कोषागार से ₹89.27 लाख की अवैध निकासी के मामले में साढ़े तीन साल की सजा सुनाई गई थी। झारखंड हाई कोर्ट ने उनकी आधी सजा की अवधि पूरी होने के आधार पर जमानत दी थी।

सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने सीबीआई की आपत्ति को दरकिनार करते हुए हाई कोर्ट को निर्देश दिया कि वे इस मामले से जुड़ी सभी लंबित अपीलों की सुनवाई तेज करें और 6 महीने के भीतर इनका निपटारा करें।

  • क्या राज्यों के अधिकार क्षेत्र में दखल देता है NIA एक्ट? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब
    सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) अधिनियम, 2008 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।

विवाद की मुख्य वजह क्या है?
न्यायमुूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के सामने याचिकाकर्ता ने दलील दी कि भारत के संविधान के तहत ‘पुलिस और कानून-व्यवस्था’ पूरी तरह से राज्य सूची (State List) का विषय है।

संविधान के उल्लंघन का आरोप: याचिका में दावा किया गया है कि NIA एक्ट केंद्र सरकार को राज्यों की सहमति के बिना, स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लेकर किसी भी मामले की जांच अपने हाथ में लेने का असीमित अधिकार देता है। यह संघीय ढांचे पर चोट है और संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है।

अदालत ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी की समय मांगने की दलील को स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 6 सप्ताह बाद तय की है।

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